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मोदीराज लाओ

मोदीराज लाओ
भारत बचाओ

मंगलवार, 28 मार्च 2017

हिन्दू नववर्ष की हार्दिक बधाईयां और शुभकामनायें

 

हम भारतीय नव वर्ष का प्रारम्भ हिन्दू, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से मानते  हैं क्योंकि ?
• इस तिथि से ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण प्रारम्भ किया।
• मर्यादापुर्षोत्तम भगवान श्री रामचन्द्र जी का इस दिन राज्याभिषेक हुआ।
• इस दिन नवरात्रों का महान पर्व आरम्भ होता है।
• देव भगवान झूले लाल जी का जन्म दिवस ।
• महाराजा विक्रमादित्य द्वारा विक्रमी संवत का शुभारम्भ ।
• राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के संस्थापक डा. केशव बलिराम हेडगेवार जी का जन्म दिवस।
• महर्षि दयानन्द जी द्वारा आर्य समाज का स्थापना दिवस।
• संसार के अधिकतर देशों के बजट की भी इन्हीं दिनों(पखवाड़े में) शुरूआत होती
इसके अतिरिक्त ये वो वक्त है जब हमारे शरीर में नए खून का ज्वार उठता है व हमारे आसपास की प्रकृति भी नए कपड़े डालकर नव वर्ष शुरू होने का संकेत दुनिया के जागरूक लोगों तक पहुंचाती है…

दूसरी तरफ बहुत से बौद्धिक गुलाम लोग ग्रेगेर्रियन कलैंडर के अनुसार 1 जनवरी को,  एक वयक्ति इसामशीह  के मरनोउपरांत खुशियां मनाकर उसे नववर्ष का नाम देकर दुनिया को भ्रमित करने की पुरजोर कोशिश करते हुए मानवता का मखौल उड़ाते हैं अब ये आपके अपनी इच्छा है कि
आप अपनी आने वाली पिढ़ीयों को कैसा बनाना चाहते हैं
ऐसा

(अंग्रेजी नव वर्ष पहली जनवरी मनाने वाला)
या फिर ऐसा

(भारतीय नव वर्ष वर्षप्रतिपदा मनाने वाला)
ऐ वतन तेरी कसम ,कुर्बान हो जांएगे हम ।
                                          तेरी खातिर मौत से भी , जा टकरांएगे हम ।
संस्कार एक दिन में न बनता है न बिगड़ता है यह एक सतत प्रक्रिया है आप अपने आपको कौन सी प्रक्रिया के हवाले करते हैं वही आपका संस्कार निर्माण करेगा।
जागो भारतीयो जागो पहचाने अपने अन्दर वह रहे भारतीय खून को और इस खून से जुड़ी महान सच्चाईयों को… जिनमें से नव वर्ष, 

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा

से प्रारम्भ होता है…. भी एक सच्चाई है
आप सबको हिन्दू नबवर्ष के शुभ अवसर पर एक वार फिर हार्दिक शुभकामनायें

मंगलवार, 14 फ़रवरी 2017

जागो हिन्दू जागो

https://samrastamunch.wordpress.com/2009/12/26/%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%a3-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%82/

शुक्रवार, 13 मई 2016

मदरसे से धमकी बताओ क्या करें ?


मित्रो आज जब में बद्दी से चंडीगढ जा रहा था तो New Chandigarh में T point पर बने flyover से 400 मीटर पहले शब्जी खरीदने के लिए रूका । जब सब्जी लेकर बापस जाने  लगा तभी तीन बच्चे अरवी टोपी पहन कर मेरे पास से गुजरने लगे । मेंने उनसे बात की वो रूक गए। जैसा कि सरकार की नीति है कि सभी बच्चों को विद्दयालय भेजना चाहिए। मैंने बच्चों से प्रश्न किया। बातचीत इस प्रकार से हुई।

अध्यापक  बच्चो क्या आप सकूल जाते हो ?

बच्चे:       नहीं हम मदरसे में जाते हैं ।

अध्यापक  मदरसे में पढकर क्या करोगो ?

बच्चे   अपने लिए और दुनिया के लिए काम करेंगे और आगे के लिए भी

अध्यापक       लेकिन क्या काम करोगे?

 बच्चे .........

अध्यापक       सकूल जाओगे तो पढ़ाई करके रोजगार मिलेगा जो मदरसे में पढकर नहीं मिल सकता । क्या आप अरब देशों के बारे में जानते हैं?

बच्चे          हां।

अध्यापक वहां तो सबलोग मदरसे में ही जाते हैं और सब एक दूसरे की मारकाट मचाए हुए हैं क्या यह सही है?

बच्चे    सही है न ।

अध्यापक  क्यों ?

बच्चे   जो नमाज नहीं पढता उसे मार देना चाहिए।

अध्यापक       यह तो गलत बात है।

बच्चे          नहीं यह सही है ।

अध्यापक       आपको किसने बताया

बच्चे          यह किताब में लिखा है

अध्यापक       कुरान में नहीं लिखा है

बच्चे लेकिन  ... में लिखा है ।

अध्यापक       किताब किसने लिखी ?

बच्चे   किताब नबियों ने लिखी।

अध्यापक  लेकिन अल्लहा ने तो नहीं लिखी। जरा सचो मैँ भगवान राम को मानता हूँ

बच्चे   ऱाम नहीं है

अध्यापक       लेकिन यैं मानता हूँ कि राम है और मैँ हनुमान चालीसा पढ़ता हूँ

बच्चे          फिर तो अल्लाह को ही राम कहते होंगे

अध्यापक       अब अगर मैं यह कहूँ कि जो हनुमान चालीसा नहीं पढ़ते उन सबको मार देना चाहिए तो क्या यह सही है

बच्चे          नहीं यह सही नहीं है

अध्यापक लेकिन अगर नबाज न पढ़ने बालों को मारना सही है फिर तो हनुमान चालीसा न पढ़ने बालों को मारना कैसे गलत हो सकता है? बैसे भी जो इन्सान को  मारने की शिक्षा दे वो ईन्सान नहीं राक्षस है जानवर है क्योंय़

बच्चे           हमें क्या पता ?

अध्यापक             लेकिन जरा सोचो अगर देश में 80 करोड़ हिन्दू बच्चों को यह शिक्षा दें कि नबाज न पढ़ने बालों को मारने की शिक्षा देने बालों को मारो तो देश में क्या होगा ?

बच्चे          फिर तो दोनों ही गलत हैं

अध्यापक अगर आपको मदरसे में दूसरों को मारना सिखाया जा रहा है तो यह शिक्षा गलत है और आप अपने मां बाप को बताओ कि हमें एसा पढा रहे हैं आपकी मां जरूर मना करेगी । अगर आप सकूल जायेंगे तो आपको खाना किताबें कपड़े फ्री मिलेंगे और पढलिखकर अप बहुत पैसे कमाओगे अपने माता पिता को भी शुख दोगे और खुद भी शुख पाओगे । और अगर दूसरों को मारोगे तो आपको भी कोई मारेगा जैसे अमेरिका अरब देशों व पाकिस्तान में आतंकवादियों को मार रहा है ।

बच्चे हां       पाकिस्तान में ऐसे ही लोग क दूसरे को मारते हैं इसीलिए हम पाकिस्तान से यहां आए हैं।

अध्यापक       कब आए आप पाकिस्तान से?

बच्चें          हम नहीं हमारे अबू आए थे।

अध्यापक       कितने दिन पहले ?

बच्चे          बहुत दिन हो गए।

अध्यापक       कहां आपके अबु उनके पास जाओ।

बच्चे          मेबात में रहते हैं।

अध्यापक अगर आप अपने माता पिता के पास जाओगे तो आपकी पढ़ाई लिखाई का खर्चा हम उठायेंगे बायदा रहा ये लो मेरे फोन नम्वर । जाना जरूर बरना दूसरों को मारने की शिक्षा देने बाले आपको बर्बाद कर देंगे

तब तक अध्यापक के परिचित लोगों की गाड़ी आ गई तो वो थोड़ा आगे रूकी अध्यापक उनको सारी बात बताने और बच्चों से मिलाने उनके पास गया लेकिन उन्नहोंने कोई रूची नहीं ली यह जरूर कहा यहां अकेले मत रूको। जब तक अध्यापक बापस आया बच्चे रोड़ के सामने से जा रहे थे अध्याक ने बच्चो को टाटा किया और बच्चों ने भी बच्चों के चेहरे पर खुशी साफ दिख रही थी यह सारी घटना लगभग 3 बजकर 50 मिन्ट पर हुई।

 

4:33 अध्यापक के फोन नम्वर पर एक पोन नम्मवर 9988967225 से फोन फोन आता है अध्यापक फोन उठाता है उधर से धमकी आती ...बहन के .....(गाली) ...दोवारा ईधर से आ तुझे देखते हैं तेरा यह साहस कैसे हुआ कहने का कि यहां गलत शिक्षा मिलती है तुझे छोड़ेंगे नहीं.....और पता नहीं क्या क्या
अध्यापक बेटा गाली नहीं निकालते । हमारा काम है बच्चों को लड़ाई झगड़े से बचाना क्योंकि बच्चे अगर एक दूसरे को मार देंगे तो तो किसका फायदा होगा
?(अध्यापक के सकूल में बच्चों का झगड़ा हुआ था अध्यापक ने सोचा बच्चों के दोस्तों का फोन है)

धमकी देने बाला ..किसी का नहीं ।

अध्यापक एक बच्चा दूसरे बच्चे से कह रहा था कि मैं ...जाति का हूँ दूसरे को नहीं छोडूँगा । मैंने उसको समझाया कि हिन्दू न ब्राहमण होता हा न क्षत्रिए न वैश्य न शूद्र ..हिन्दू सिर्फ हिन्दू होता है ।जब इसलामिक आतंकवादियों ने भारत के तीन टुकड़े कर दिए तो ....जाति के लोग कहां थे इसलिए हिन्दू हम सब एक हैं न कोई छोटा न कोई बढ़ा ....

धमकी देने बाला... ईसीलिए हर मुसलमान एक जैसा नहीं होता ।

अध्यापक  तो आप मुसलमान वोल रहे हैं बाई दा वे आप बोल कहां से रहे हैं ?

फोन काट दिया

अध्यापक ने फोन मिलाया

अध्यापक             तो आप मदरसे से बोल रहे हैं

धमकी देने बाला        हाँ मदरसे से बोल रहा हूँ

अध्यापक   अगर आप बच्चों को गैर मुसलमानों को मारने की शिक्षा दे रहे हैं तो गलत कर रहे हैं और ऐसी शिक्षा ही गलत है।
धमकी देने बाला     आपको कैसे पता हम गैर मुसलमानों को मारने की शिक्षा दे रहे हैं
अध्यापक          बच्चों ने बताया
 
धमकी देने बाला....बच्चे मन कर दें तो
अध्यापक    बच्चे हमेशा सच बोलते हैं और सच ही बोलेंगे हमारे या आपको बोलने से वो झूठ नहीं बोलेंगे

धमकी देने बाला         आपको हमारी शिक्षा का नहीं पता हमें आपकी शिक्षा का नहीं पता

अध्यापक             रही बात आने की बात तो मैं आऊंगा ही और मित्रों को साथ लेकर आऊँगा और अगर मैं इतना ही कमजोर और डरपोक होता तो पोन नम्वर देकर नहीं आता...

धमकी देने बाला ..आना देख लेंगे फोन कट

अब मित्रो आप खुद ही देख लो कि किस तरह से मदरसों में पाकिस्तान से गरीब लोगों को यहां बसाकर उनकी लाचारी का फायदा उठाकर उनके बच्चों को गैर मुसलमानों को मारने की शिक्षा दी जा रही है इसलाम की शिक्षा के नाम पर।

 बच्चों को समझाने बाले हमारे जैसे लोगों को धमकी दी जा रही है वो भी हिन्दू सिख बहुल क्षेत्रों में । जरा सोचो ......

रही बात धमकी की तो हम घबराने या डरने बाले नहीं लेकिन अगर अगर ईस मदरसे से हमारे उपर कोई हमला होता है हमें नुकसान पहंचाया जाता है या मार दिया जाता है तो आपको क्या करना है इसका फैसला हम आप पर छोड़ते हैं बैसे अभी हम मरने बाले नहीं क्योंकि श्रीमदभगवत गीता में लिखा है कि मौत को न एक पल आगे किया जा सकता है न ही पीछे।

अगर आप में से किसी के सम्पर्क पंजाब सरकार में हैं तो अगर पंजाब पुलिस वहां रेड डालकर उस किताब को जब्त कर ले जिसमें नमाज न पढ़ने बालों को मारने की शिक्षा दी जा रही है तो वाकी काम कानून कर देगा अन्यथा भारत में ही गैरमुसलमानों को कत्ल करने की शिक्षा देकर भारत को इसी तरह से लहुलुहान कर तोड़ा जाता रहेगा...और हम अपने मरने की बारी का इन्तजार करते रहेंगे

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

  

शुक्रवार, 11 मार्च 2016

ऊँ नमो शिवाय: ऊँ नमो शिवाय: ऊँ नमो शिवाय: ऊँ नमो शिवाय: ऊँ नमो शिवाय:

ऊँ नमो शिवाय: ऊँ नमो शिवाय: ऊँ नमो शिवाय: ऊँ नमो शिवाय: ऊँ नमो शिवाय:
ऊँ नमो शिवाय: ऊँ नमो शिवाय: ऊँ नमो शिवाय: ऊँ नमो शिवाय: ऊँ नमो शिवाय:
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 ऊँ नमो शिवाय: ऊँ नमो शिवाय: ऊँ नमो शिवाय: ऊँ नमो शिवाय: ऊँ नमो शिवाय:
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ऊँ नमो शिवाय: ऊँ नमो शिवाय: ऊँ नमो शिवाय: ऊँ नमो शिवाय: ऊँ नमो शिवाय:

 

गुरुवार, 18 सितंबर 2014

न मोदी जी बदले हैं न बदलगें ....


 
मोदी जी की अलोचना करना और मोदी जी को बदनाम करना मोदीबिरोधियों का पैसा प्राप्त करने और प्रचार पाने का सबसे बड़ा साधन है इसलिए हम मोदीबिरोधियों द्वारा मोदी जी की अलोन का कभी जबाब नहीं देते ।

लेकिन आजकल कुछ ऐसा हो रहा है जिसका जबाब देना बहुत जरूरीही नहीं बल्कि मजबूरी बन गया है है क्योंकि अब बहुत से ऐसे लोग भी मोदी जी की अलोचना कर रहे हैं जो चुनाबों तक मोदी जी के सच्चे पक्के समर्थक थे और उनके समर्थन का सबसे बड़ा कारण था उनका ये भरोसा कि मोदी जी के प्रधानमन्त्री बनने पर न केबल हिन्दूओं पर सेकुलर पार्टियों के सहयोग से मुसलमानों और ईसाईयों द्वारा किए जा रहे अत्याचार बन्द होंगे बल्कि वल्कि इसलामिक आतंकवादियों को छुड़वाने के सेकुलर गद्दारों की सरकारों द्वारा जेलों में बन्द किए गए हिन्दूंओं की रिहाई भी होगी।

हिन्दूओं जख्मों पर नमक डालने काम न्यायालय का वो निर्णय करता है जिसमें भारतीयों के कातिल इटालियन सैनिक को इस आधार पर स्वादेश भेज दिया गया कि बो बीमार हैं लेकिन कैंसर से पीड़ित साध्यवी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को घर भेजने के लिए भारत की सेकुलर अदालतें त्यार नहीं....

मित्रो बिषयान्तर न करते हुए हम मोदी जी की अलोचना पर ही केन्द्रित करेंगे....

मित्रो क्या आप जानते हैं कि अमिका का राष्ट्रपति पद ग्रहण करने के लिए बाईबल की कसम उठाता है जो कि दुनिया को ये सन्देश देने के लिए काफी है कि अमेरिका के राष्ट्रपति का पहला काम चर्च(ईसाईयत) की रक्षा व प्रसार करना है।

ठीक इसी तरह मोदी जी द्वारा जापान के प्रधानमन्त्री को श्रीमदभगबत गीता प्रदान करना दुनिया को ये सन्देश देने के लिए काफी है कि मोदी जी का पहला काम भारतीय संस्कृति बोलो तो हिन्दूसंस्कृति की रक्षा करना है।

अब रही बात निर्दोष हिन्दूओं को जेलों से बाहर करने की तो कोई भी वयक्ति इस बात को समझ सकता है कि इन हिन्दूओं ने कोई गुनाह नहीं किया है इन्हें सेकुलर सरकार ने इटालियन अंग्रेज के ईसारे पर इसलामिक आतंकवादियों को छुड़बाने के लिए लों में डाला है तो फिर इन निर्दोषों को जेलों से छुड़वाने के लिए मोदी जी को हस्तक्षेप करने की क्या जरूरत है क्योंकि जब न इन्होंने कोई अपराध किया है न कोई इनके बिरूद्ध कोई प्रमाण है तो इनका छूटना तो निस्चित ही है जिस तरह स्वामी असीमानन्द जी के निर्दोश होने की बजह से उन्हें जमानत मिली इसी तरह बाकी लोगों को भी मिलेगी और बहुत से निर्दोष हिन्दूओं को जमानत मिल भी चुकी है।

हाँ मोदी जी को ये जरूर आदेश देना चाहिए कि इनके मामलों की सुनबाई यथाशीध्र पूरी की जाए और बो होगी भी....

अगर फिर भी सेकुलर अदालतें इन निर्दोष हिन्दूओं को जेलों से छोड़ने से मना करती हैं जो कि नहीं करेंगे तब न्यापालिका को सेकुलर गद्दारों से मुक्त करवाने के लिए प्यत्न करने चाहिए हिन्दूजागरम अभियान चलाकर....

आप लोगों को ऐसा लगेगा कि हमारी अदालतें निष्पक्ष हैं लेकिन ये बास्तबिकता से परे है बरना ये अदालतें ऐसे फैसले नहीं देती जिनके अनुसार कानून सिर्फ हिन्दूओं पर लागू हो गैर हिन्दूओं पर नहीं....

सब देशभक्तों को ये खुशी होनी चाहिए कि मोदी जी भारत के ऐसे पहले प्रधानमन्त्री हैं जिन्होंने दिन में 14-15 घंटे काम करते हुए भ्रष्टाचार पर पूर्ण बिराम लगाने के लिए हर तरह के कदम ठाए हैं ।

मित्रो हम सब को ये नहीं झूलना चाहिए कि किस तरह से मोदी जी ने सेकुलर पार्टियों से बदला चुकाया है सेकुलर राज्यपालों को हटाकर क्योंकि इन सेकुलर पार्टियों ने राज्यपालों को सिर्फ इसलिए हटाया था कि बो हिन्दुत्वनिष्ठ हैं।

हमें पूरा भरोसा है कि निर्दोष हिन्दूओं पर रामलीला मैदान में 4 जून को हमला करवाने बालों व निर्दोष हिन्दूओं को हिन्दू आतंकवादी कहकर जेलों में डलवाने बालों का हिसाब भी मोदी जी चुन-चुन कर पूरा करेंगे...

रही बात कशमीरघाटी में पानी में डूबे आतंकवादियों को मरने से बचाने की और आतंकवादियों और उनके समर्थकों को राहत देने की तो हम सबको ये द्यान रखना चाहिए कि इन तंकवादियों ने जितना खून हिन्दूओं का बहाया है उससे कहीं ज्यादा इन आतंकवादियों ने मुसलमानं का भी खून बहाया है इन तंकवादियों बहुत जल्द बहां की जनता ही दौड़ा-दौड़ा कर मारेगी ये आप लोग बहुत जल्द देंखेंगे कशमीर घाटी व देश क अन्य हिस्सों में होता हुआ बैसे भी शेर अपने शिकार को दौड़ा दौड़ा कर मारता है।

मित्रो एक बात याद रखना आज हमें पूरा भरोसा है कि मोदी जी दुनियाभर में हिन्दूओं के रक्षक के रूप में अपनी झूमिका अदा करेंगे लेकिन इसका मतलब कदापि ये नहीं कि हम ये चाहते हैं कि मी जी वाकी लोगों के साथ भेदभाव करें हम तो सिर्फ इतना चाहते हैं कि मोदी जी देसभर में एकसमान नागरिक संहिता लागू कर सब भारतीयों के लिए एक जैसे अबसर उपलब्ध करवायें….

कुल मिलाकर हमारा मानना है कि न मोदी जी बदले हैं न बदलगें ....मोदी जी देशभक्त थे हैं और रहेंगे

अगर आप भी ऐसा ही महसूस करते हैं तो याद करो सेकुलर गद्दारों द्वारा 50 वर्ष तक हिन्दूओं पर किए गए अत्याचारों और हिन्दूओं के साथ किए गए भेदभाव को और डट जाओ राज्यों के चुनाबों में मोदी जी को जितवाने के लिए ....दिलवाओ मोदी जी को राज्यसभा में बहुमत फिर देखो मोदी जी क्या कमाल करते हैं

 

  

मंगलवार, 2 सितंबर 2014

जानो , समझो और सांझा करो अपने प्रिय बाबा भीमराब अम्मबेडकर जी को

समरसता के प्रेरणास्त्रोत हमारे डा. भीमराव अम्बेडकर जी---1




19वीं शताब्दी में अनेक अवतारी महापुरूषों ने भारत की धरती पर जन्म लिया। 14 अप्रैल 1881 का दिन ऐतिहासिक दिन था। इस दिन डा. भीमराव अम्बेडकर जी का जन्म हुआ। वर्षप्रतिपदा 1889 को डा. हैडगेवार जी का जन्म हुआ । 1983 में डा. हेडगेवार जी के जन्मदिन वर्षप्रतिपदा पर समरसता शब्द डा. अम्बेडकर जी की ही देन है। परमपूजनीय गुरूगोविन्द सिंह ने क्रांति का सूत्रपात किया। “सिंह” शब्द नाम ने न्यूनता ग्रंथि से ग्रसित करोंड़ों के समाज को आन्दोलित , प्रेरित करने का यशस्वी प्रयत्न किया।


अवतारीमहापुरूषों का जीवन वाल्यकाल से ही संकटों में गुजरता है जिस प्रकार भगवान राम ,भगवान कृष्ण , स्वामी विवेकानन्द व गुरूगोविन्द सिंह जी का बाल्यकाल संकटों व संघर्षों में गुजरा---डा हेडगेवार जी का वाल्यकाल भी संकटों के दौर से ही गुजरा----डा. हेडगवार जी ने 13 वर्ष की आयु में ही अपने माता-पिता को एक ही चिता में मुखाग्नि देने के बाद सारा जीवन कष्टों व संघर्षों में बिताया।घर में चाय तक पीने के लिए पैसे उपलब्ध नहीं रहते थे।


उसी प्रकार डा. भीमराव अम्बेडकर जी का जीवन भी कष्टों व संघर्षों के लिए ही जाना जाता है। डा भीमराव अम्बेडकर जी ने भी न्यूनता ग्रंथि से ग्रसित करोंड़ों हिन्दूओं को एक नई राह दिखाई वो राह जो उनके अन्दर आत्मविश्वास व आशा का संचार करती थी।


डा. भीम राव जी के एक प्रिय गुरू जी का अन्तिम नाम अम्बेडकर था उन्हीं के नाम पर डा. भीमराव जी का नाम भीम राव अम्बेडकर हुआ। डा. भीमराव अम्बेडकर जी की माता जी का देहांत तो 5वर्ष की आयु में ही हो गया । फिर भी उन्हें अपने पिता जी से घर में ही अच्छे संस्कार मिले। मुम्बई में एक ही कमरे में दोनों रहते थे ।एक सोता था तो एक पढ़ता था इतना छोटा कमरा था वो। आगे चलकर इन्हें केअसकर नाम के व्यक्ति( सज्जन) मिले जिन्होंने इनका परिचय बड़ौदा के महाराजा सहजराव गायकवाड़ जी से करवाया ।गायकवाड़ जी ने इन्हें छात्रवृति लगा दी । गायकवाड़ जी ने अम्बेडकर जी को विदेश भेजा बाद में लन्दन गए। लन्दन में खरीदी पुस्तकें मालबाहक जहाज में भेजने के कारण डूब गईं जिनका मुआवजा 2000 रूपए मिला फिर बड़ौदा गए। Ph. D करने पर बड़ौदा आने के बाद अम्बेडकर जी को तरह तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा। जिससे उनके मन में पीड़ा तो हुई पर कभी उनके मन में कटुता पैदा नहीं हुई।


फिर उनके मन में LAW की पढ़ाई करने का विचार आया। कोहलापुर के महाराजा ने उन्हें लंदन भेजा। डा. अम्बेडकर जी ने संस्कृत सीखी ।स्पृश्य-अस्पृश्य क्या है जानने का प्रयत्न किया।वेद, उपनिषद् , भगवद गीता सबका डटकर अध्ययन किया --साहित्य लिखा। डा.अम्बेडकर जी अन्त में इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि छुआ-छूत मुगलकाल की देन है । हिन्दू धर्म में इसका कोई स्थान नहीं। आर्य-द्रविड़ भेद पैदा करना अंग्रेजों की हिन्दूओं को आपस में लड़वाने की चाल है ऐसा उन्होंने खुद महसूस किया व ये सब उन्होंने लोगों को समझाने का भी प्रयत्न किया। आर्य बाहर से नहीं आए ये डा. अम्बेडकर जी ने कहा।


WHO ARE SHUDRAS में अम्बेडकर जी ने कहा जिस हिन्दू धर्म का ज्ञान इतना श्रेष्ठ है कि उस ज्ञान के प्रभाव से चींटी, सांप, तुलसी मतलब छोटे से चोटे जीव से लेकर पेड़-पौधों तक की पूजा करने वाला हिन्दू, हिन्दू को न छुए ऐसा कैसे हो सकता है ?


उन्होंने सपष्ट कहा कि समस्या धर्म की नहीं समस्या मानसिकता की है खासकर स्वर्ण मानसिकता की जो गुलामी के प्रभाव के कारण विकृत हो चुकी है जिसे बदलने की जरूरत है । यदि स्वर्ण मानसिकता बदलेगी तो हिन्दू समाज बदलेगा ।



समरसता के प्रेरणास्त्रोत हमारे डा. भीमराव अम्बेडकर जी----2



WHO ARE SHUDRAS में अम्बेडकर जी ने कहा जिस हिन्दू धर्म का ज्ञान इतना श्रेष्ठ है कि उस ज्ञान के प्रभाव से चींटी, सांप, तुलसी मतलब छोटे से चोटे जीव से लेकर पेड़-पौधों तक की पूजा करने वाला हिन्दू, हिन्दू को न छुए ऐसा कैसे हो सकता है ?



उन्होंने सपष्ट कहा कि समस्या धर्म की नहीं समस्या मानसिकता की है खासकर स्वर्ण मानसिकता जो गुलामी के प्रभाव के कारण विकृत हो चुकी है जिसे बदलने की जरूरत है । यदि स्वर्ण मानसिकता बदलेगी तो हिन्दू समाज बदलेगा ।


उन्होंने सत्याग्रह का शस्त्र उठाया। भगवद गीता को हथियार बनाया।तालाब के पानी हेतु---महाड़ सत्यग्रह ।नासिक के कालराम मन्दिर में प्रवेश हेतु सत्याग्रह किया लाठियां खाईं।


1935 में रूढ़ीबादिता व भ्रम के शिकार लोगों को Shock TREATMENT देते हुए कहा सुधरना है तो सुधर जाओ वरना मैं धर्मांतरण कर लूंगा। जबकि वासत्विकता यह है कि उन्होंने कभी धर्मांतरण किया ही नहीं। उनके सारे सहित्य में हिन्दू राष्ट्र शब्द का प्रयोग बार-बार हुआ है उन्होंने जातिविहीन समाज रचना, राष्ट्र संगठन सब पर लिखा है।


1947 में मुसलिम अलगावबाद के परिणास्वारूप देश का विभाजन हो गया । जिस पर अम्बेडकर जी ने सपष्ट कहा कि अब जबकि मुसलमानों को अलग देश दे दिया गया है तो हमें पाकिस्तान से सब हिन्दूओं को भारत ले आना चाहिए व भारत से सब मुसलमानों को पाकिस्तान भेज देना चाहिए ताकि मुसलमान अपने घर पाकिस्तान में सुख से रहें और हिन्दू अपने घर भारत में सुख से रहें। आज चारों ओर फैले मुसलिम आतंकवाद को देखकर आप खुद समझ सकते हैं कि डा. अम्मवेडकर जी कितने दूरदर्शी थे।


विभाजन के बाद Hindu Code Bill अम्बेडकर जी की हिन्दू समाज को सबसे बढ़ी देन है । इसी में अम्बेडकर जी ने ‘हिन्दू किसे कहते हैं, इसकी व्याख्या की जिसमें सपष्ट कहा गया कि विदेशी धारणाओं इस्लाम और इसाईयत को छोड़कर भारत में रहने वाले (हिन्दू-सिख-बौद्ध-जैन----इत्यादि) सब लोग हिन्दू हैं।

समरसता के प्रेरणास्त्रोत हमारे डा. भीमराव अम्बेडकर जी--3
विभाजन के बाद Hindu Code Bill अम्बेडकर जी की हिन्दू समाज को सबसे बढ़ी देन है । इसी में अम्बेडकर जी ने ‘हिन्दू किसे कहते हैं, इसकी व्याख्या की जिसमें सपष्ट कहा गया कि विदेशी धारणाओं इस्लाम और इसाईयत को छोड़कर भारत में रहने वाले (हिन्दू-सिख-बौद्ध-जैन----इत्यादि) सब लोग हिन्दू हैं।



ये उन्हीं की दूरदर्शिता थी कि उन्होंने SC/St के नाम से वंचित हिन्दूओं के लिए अलग से आरक्षण की व्यवस्था बनाकर अंग्रेजों के बड़े पैमाने पर धर्मांतरण करने के षडयन्त्र को असफल किया।


अम्बेडकर जी ने सबको राजकीय समानता दिलवाते हुए सबके लिए एक ही वोट का प्रावधान किया। डा. भीमराव अम्बेडकर जी ने 1965 में कहा कि वेशक मेरा जन्म हिन्दू धर्म में हुआ है पर हिन्दू के रूप में मैं मरूंगा नहीं ।


अपनी जिन्दगी में जाति के कारण भी कई तरह के असहनीय कष्ट सहने के बाद भी उन्होंने हिन्दू हित के लिए काम करते हुए अन्त में बौद्ध मत अपनाया जो कि हिन्दू समाज का अपना ही मत है इसलिए उसे धर्मांतरण नहीं कहा जा सकता। उन्होंने किसी विदेशी अबधारणा को नहीं अपनाया। ये भी उनके मन में अपने देश-संस्कृति के प्रति अटूट प्रेम को दर्शाता है।


हैदराबाद के निजाम द्वारा 40 करोड़ ( आज आप अनुमान लगा सकते हैं कि कितना अधिक धन बनता है ये) व औरंगावाद में बंगला,जमीन का प्रलोभन देने के बाबजूद डा. भीम राव अम्बेडकर जी ने अत्याचारी इस्लाम स्वीकार नहीं किया ।


इसी तरह उन्हें ईसाईयों द्वारा ईसाईयत अपनाने के लिए भी कई तरह के प्रलोभन दिए गए लेकिन उन्होंने ईसाई बनना भी सवीकार नहीं किया।


वो अच्छी तरह जानते थे कि ये दोनों विदेशी अवधारणायें देशहित-हिन्दू हित में नहीं हैं ।


उन्होंने अपने वंचित हिन्दू भाईयों को सपष्ट आदेश दिया कि बेशक अपने हिन्दू भाईयों में कमियां हैं वो गुलामी के प्रभाव के कारण स्वर्ण मानसिकता के शिकार हैं पर अत्याचारी मुसलमान व लुटेरे ईसाई किसी भी हालात में हमारे हित में नही हो सकते ।


आज जिस तरह धरमांतरित हिन्दूओं को दलित व काले ईसाई कहकर पुकारा जा रहा है व धर्मांतरित हिन्दूओं को जिस तरह पाकिस्तान व बंगलादेश में मस्जिदों में बमविस्फोट कर मारा जा रहा है ,मुहाजिर कहा जा रहा है भारत में भी मुसलिम बहुल क्षेत्रों में निशाना बनाया जा रहा है उसे देख कर आप समझ सकते हैं कि डा. भीमराव अम्वेडकर जी कितने दूरदर्शी व देशहित-हिन्दूहित में कितने विस्तार से सोचने व निर्णय लेने में समर्थ थे।


दुनिया को धर्म सिखाना ही भारत की विभूतियों का काम है Deep Cultural Unity in our Society(India) में लिखते हैं कि आपस में झगड़ों के बाबजूद हिन्दू समाज एक है और एक रहेगा । मानसिकता में परिवर्तन के साथ ही ये झगड़े भी समाप्त हो जायेंगे।


1916 में लखनऊ पैक्ट में 13% मुसलमानों को 30% सीटें देने का उन्होंने कांग्रेस के हिन्दूविरोधी रूख के बाबजूद डटकर विरोध किया। उन्होंने कहा कि जो बात हिन्दू हित की नहीं वो देशहित की कैसे हो सकती है।आज हर देशभक्त को अपने घर में डा. भीमराव अम्बेडकर जी का चित्र लगाना चाहिए व उनके बताए मार्ग पर चलने का प्रयत्न करना चाहिए।

बुधवार, 30 जुलाई 2014

सहारनपुर का सबक

हिन्दूओ ध्यान से सुन लो जिस दिन आप लोग ये समझ जाओगे कि आपके पड़ोश में मजार-मसजिद-मदरसे-पीर का बनना या फिर मुसलिम को काम पर लगाना या किराएदार बनाना या मुसलिम रेड़ी-फेरी बाले से समान खरीदना उस इसलामिक आतंकवाद को निमन्त्रण है जो कल आपका व आपके बच्चों का खून बहाएगा उस दिन इसलामिक आतंकवाद का अन्त निश्चित हो जाएगा

वन्देमातरम्

वन्देमातरम्

मंगलवार, 6 मई 2014

काश भारत का हर नागरिक मेरे इस दोस्त की तरह राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानकर बोट करता


मित्रो आज में एक ऐसे मित्र से मिला जिसके नाना जी, दादा जी और पिता जी तीनों ही काँग्रेस के समर्थक रहे हैं और बो खुद भी हिमाचल के मुख्यमन्त्री बीरभद्र सिंह जी व स्थानीय बिधायक का समर्थक है लेकिन वो कह रहा था कि ये सब होने के बाबजूद भी बो काँग्रेस व अन्य सेकुलर पार्टियों को केन्द्र में बोट नहीं दे सकता क्योंकि पिछले 10 बर्ष में काँग्रेस ने देश को तबाह करने के लिए ऐसे-ऐसे भारतबिरोधी निर्णय लिए जो मजबूर करते हैं कि काँग्रेस को केन्द्र से हटाया जाए ....

उसके अनसार ये हैं बो कारण जो उसे बजबूर कर रहे हैं काँग्रेस को बोट नहीं देने के लिए

1)      भारतीय सेना में हिन्दू मुसलिम की गिनती करने का आदेश देकर सेना में फूट डालने की कोशिश

2)      अऱ्धसैनिक बलों के जवानों के शहीद होने पर उनके परिबार को मिलने वाली आर्थिक सहायता बन्द करना

3)      पाकिस्तानी आतंकवादियों को 3-3 लाख की FD देकर उन्हें कशमीर में बसाना व सैनिकों द्वारा अपनी कुर्बानी देकर मारे गए आतंकवादियों के परिबारों को पैंसन देकर शहीदों का अपमान करना व आतंकवादियों का हौसला बढ़ाना

4)      आसाम में वंगलादेशी घुसपैठियों के बचाब के लिए बहां की कांग्रेस सरकार द्वारा बनाए गए कानून को माननीय सर्बोच्च न्यायलय द्वारा रद्दा करने के बाबजूद उसे दोबारा से लागू करना

5)      भारत में अराजकता और अस्थिरता का महौल बनाकर कारोबार को इस हद तक नुकसान पहुंचाना कि नौजवानों को  रोजगार मिलने के सब दरबाजे बन्द कर देना

बुधवार, 1 जनवरी 2014

आज बौद्धिक गुलामों ने जब दिनभर HNY कह-कहकर जब नाक में दम कर दिया तो हमें एक अंग्रेज याद आ गया


आज बौद्धिक गुलामों ने जब दिनभर HNY कह-कहकर जब नाक में दम कर दिया तो हमें एक अंग्रेज याद आ गया । उस अंग्रेज का नाम है मैकाले। मैकाले ने बहुत अध्ययन के बाद पाया कि 500 वर्ष की मुसलमानों की गुलामी और लगभग 250 वर्ष की अंग्रेजों की गुलामी बाद भी भारतीय संस्कृति अपने मूल स्वारूप में यथाबत है...तब उसने योजना बनाकर 1835 में वह शिक्षा निती लागू की जिसमें आज हमारे बच्चे पढ़ रहे हैं इस शिक्षा निती को लागू करने के बाद मैकाले ने अपने Father को लिखे खत में कहा कि Father आज से 100 वर्ष बाद भारत का हर नागरिक शकल शूरत से वेशक भारतीय होगा लेकिन अकल से अंग्रेज होगा।  मैकाले के काम को 1947 में बिभाजन के बाद बचे भारत में नैहरू ने अंग्रेजी कलैडर लागू कर पूरा कर दिया। इन बौद्धिक गुलामों द्वारा  वार-वार HNY कहने से हमें लगा कि मैकाले कितना दूरदर्शी था और हमारे नेता कितने मूर्ख जो मैकाले आज भारत के हर गली मुहल्ले में बिजय का जशन मनाने में सफल रहा                                                                                          

मंगलवार, 31 दिसंबर 2013

हिन्दूओं की दुर्गति का सबसे बड़ा कारण है हिन्दूओं को जय पराजय का बोध न होना

हिन्दूओं की दुर्गति का सबसे बड़ा कारण है हिन्दूओं को जय पराजय का बोध न होना...अभी हमने हिन्दूओं को इतना बड़ा समाचार दिया लेकिन एक भी हिन्दू की नजर इस समाचार पर नहीं पड़ी..ये समाचार है गोआ में ततकाली काँग्रेस सरकार द्वारा चर्च के इसारे पर हिन्दूओं पर बम बिस्फोट का आरोप लगाकर 6 हिन्दूओं को जेल में डालना जिन्हें माननीय अदालत ने निर्दोष करार दिया...इन हिन्दूओं को काँग्रेसियों ने झूठे आरोप लगाकर चार व...र्ष तक यातनायें दी लेकिन आज जब ये नौजवान निर्दोश साबित हुए तो हिन्दूओं के पास इनके द्वारा झेले गए दुख-दर्द को साँझा करने व इनकी आजादी की खुशी में सामिल होने का वक्त नहीं यही हैं विदेशी सोच के गुलाम हिन्दू जिनके पास विदेशी नव वर्ष की शुभकामनायें देने के लिए तो वक्त है लेकिन हिन्दूओं को बदनाम करने के लिए हिन्दू आतंकवाद-भगवा आतंकवाद जैसी गाली निकालने वाली काँग्रेस के षडयन्त्र का बिरोध करने के लिए वक्त नहीं.......ये रहा इन हिन्दूओं के निर्दोष साबित होने का समाचार

Dharma is finally victorious in the battle between Dharma and Adharma ! - Virendra Marathe, Managing Trustee, Sanatan Sanstha

Congress Government has given a free hand to haters of Sanatan Sanstha to defame Sanatan by needlessly entangling our 6 seekers in the 'Madgaon bomb blast' case.
Congress Government had made efforts to finish 'Sanatan Sanstha', a spiritual organisation through various means, with the help of Goa Police. Six seekers of Sanatan Sanstha had to undergo needless persecution for 4 years due to investigation by the Police in a wrong direction, and unfortunately, 4 years in their prime life have been wasted due to their stay in prison.
The Police has not found any participation of Sanatan Sanstha in this case. Even the Hon. Court has not made any comments about the participation of Sanatan Sanstha. This point was never even raised during the court proceeding. Therefore, we feel that innocence of Sanatan Sanstha proved after going through all legal processes is a slap on the cheek of haters of Sanatan Sanstha. Fact behind the saying of Dharma 'Satyamev Jayati' meaning 'Finally the truth remains victorious' as stipulated in scripture 'Mundkopnishad' has at last been proved. Dharma is finally victorious in the war between Dharma and Adharma ! Will the so-called intelligentsia and media bent on defaming Sanatan Sanstha take atonement now that the innocence of Sanatan Sanstha is proved ?......हमें 2009 में तब भी पता था जब इटालियन अंग्रेज के गुलाम काँग्रेसियों ने हिन्दूओं को हिन्दू आतंकवादी -भगवा आतंकवादी कहा था लेकिन हसी झूठ के सहारे ये भारत विरोधी 2009 जीत लिए चिल्लाते रह गए... भरोसा न हो तो इसे पढ़ लो

गोआ में मडगांव के बहाने हिन्दुविरोधी-भारतविरोधी मिडीया ईसाई मिसनरी एंटोनियो की गुलाम सरकार का देशभक्त हिन्दूओं पर एक और हमला


मेरे प्यारे हिन्दूओ आपको जरूर याद होगा कि किस तरह ईसाई मिसनरी एंटोनियो माइनो मारियो के इसारे पर लैफ्टीनैंट कर्नल पुरोहित जैसे देशभक्त सैनिक व साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर जैसे क्रंतिकारियों को झूठे मामलों में फंसाकर उन पर मकोका लगा दिया गया जिसे माननीय मकोका न्यायलय ने वाद में मनघड़ंत(झूठा) पाकर खारिज कर दिया गया ।




आपको यह भी याद होगा कि किस तरह एंटोनियो माइनो मारियो के इसारे पर तत्कालीन कानून मंत्री हंसराजभारद्वाज को एंटोनियो माइनो मारियो के हमबतन-हमराज व पार्टनर क्वात्रोची के लंदन बैंक में जब्त बोफोर्स-दलालीकांड की रकम को छुड़बाने के लिए लंदन भेजा गया और रातों-रात सारी रकम निकलवा ली गई। जब मानीय नयायलय ने उस रकम को जब्त रखने के आदेश दिए तब तक सारा काम निपट चुका था।



आपको यह भी जरूर ध्यान में होगा कि अभी हाल ही में एंटोनियो की गुलाम मनमोहन सरकार ने किस तरह बोफोर्स दलाली कांड में एंटोनियो माइनो मारियो के सह अभियुक्त क्वात्रोची को सब मुकदमों से मुक्त करने की अंतिम सफल कोशिश की । माननीय न्यायलया में कोइ अड़चन न आये इसके लिए एक अभियुक्त के सहयोगी को सरकारी बकील नियुक्त करबा दिया । क्या इससे बढ़ी बेशर्म और गद्दार सरकार आपने कभी देखी है ।



आपको जरूर यह भी याद होगा कि माननीय सर्वोच न्यायालय ने जिहादी आतंकवादी मुहम्मद अफजल को 19 नमम्वर 2006 को फांसी तय की थी जिसे गद्दारों की समर्थक ये हिन्दुविरोधी सरकार आज तक लटकाय हुए है। यह वही सरकार है जिसने हैदराबाद बम्मविस्फोटों के दोसियों को जेल से रिहा कर एक-एक आटोरिक्सा दिया ।



· आज यही हिन्दुविरोधी-भारतविरोधी मुसलिम आतंकवादियों व ईसाई दलालों की समर्थक सरकार सरारती तत्वों द्वारा किए गए बम्मविस्फोटों मे मारे गए निर्दोष शांतिप्रिय देशभक्त धार्मिक संस्था के सदस्यों के परिबारजनों को संतावना देने के बजाए उन मारे गए देशभक्तों के विरद्ध ही आरोप पर आरोप लगाय जा रही है।(for more information visit Hindu Jaguriti Samiti) आपको याद होगा कि यह वही गद्दारों की सरकार है जिसने मुसलिमजिहादी आतंकवादी इसरत जहां के मरने पर मुआबजा दिया था और देशभक्तों के मरने पर देशद्रोह का केश दर्ज कर दिया उस मुसलिम जिहादी आतंकवादी को निर्दोस सिद्ध करने के लिए ये गद्दार आज भी प्रयत्न कर रहे हैं ।



· मुम्बइ में इस गद्दारों की सरकार ने जिन मुसलिम जिहादीयों को बचाने के लिए हिन्दूक्रंतिकारियों पर झूठे आरेप लगाये और इन आरोपों को आगे बढ़ाने के लिए जिस अधिकारी का दुरूपयोग किया कुदरत का न्याय देखो वो अधिकारी उन्हीं मुसलिम जिहादी आतंकवादियों के हाथों मारा गया ।तब भी इस गद्दार मिडीया व राजनितिक दलों के घर-कुदालों ने उस हमले में हिन्दुओं को फंसाने का भरपूर प्रयास किया।



· कहते हैं जिसका कोई नहीं उसका भगवान होता है आज देशभक्त हिन्दु लगभग लावारिस व अनाथ सा जीबन जीने को मजबूर हैं । इन हालात में हम भगबान से यही प्रर्थना कर सकते हैं कि जिस तरह उसने आज तक धर्म-रक्षकों का साथ दिया है आगे भी अपना आशीर्बाद धर्मरक्षक देशभक्तों पर बनाए रखे ताकि हम इन गद्दारों के षडयन्त्रों को असफल कर अपनी प्यारी भारतमाता को इन गद्दारों से मुक्त करवा सकें। पर गीता में कहा गया है कर्म प्रधान है आओ मेरे प्यारे जागरूक हिन्दुओ खुद सक्रिए हो जाओ व बौद्धिक गुलाम हिन्दुओं को जगाकर इस हिन्दूक्रति का निर्णायक शूत्रपात करो ..... जागो हिन्दू जागो
 

बुधवार, 18 दिसंबर 2013

अपने भक्तों के बापू आशा राम बनाम सेकुलर गद्दारों के आदर्श तैहलका के मालिक तरूण तेजपाल...इतना भेदभाव क्यों?


मित्रो पहले तो ये सपष्ट कर दें कि न तो  हम आशा राम जी के समर्थक हैं और न ही तहलका के मालिक तरूण तेजपाल के । दोनों का अपना अलग-अलग भूतकाल है दोनों का अपना-अपना बजूद है।

आशा राम ठहरे कथाबचक और तरूण तेजपाल ठहरा महिलाओं के अधिकारों और इमानदारी का तथाकथित रखवाला ।

आशा राम ठहरे इटालियन अंग्रेज के कट्टर बिरोधी और तरूण तेजपाल ठहरा इस अंग्रेज के टुकड़ों पर पलने वाला सपोला।

आशा राम के जीवन पर कितने भी लांछन सरकारों द्वारा क्यों न लगाए गए हों पर आसाराम जी का सामाजिक जीवन हमेशा समाज को सही दिशा देने का प्यत्न करता हुआ प्रतीत होता है दूसरी तरफ सेकुलर गद्दार और मिडीया अपने चहेते सेकुलर तरूण तेजपाल को कितना भी सर आँखों पर रखे पर तरूण तेजपाल का सामाजिक जीवन नशे, दुराचार, बयभिचार और षडयन्त्रों से भरपूर नजर आता है।

आशा राम ने बहुत पैसा बनाया लेकिन इस पैसे को बनाने के लिए आशा राम ने देश से गद्दारी नहीं की जबकि तरूण तेजपाल ने पैसा बनाने के लिए देश के दुशमनों के साथ हाथ मिलाकर भारत में एक विदेशी की गुलाम सरकार बनाने में मदद कर देश के साथ बहुत बड़ी गद्दारी की। एक तरफ जहां आशा राम ने अपने अन्दर कमजोरियां होते हुए भी समाज को सही दिशा देने की कोशिश की वहीं तरूण तेजपाल ने खुद नशे, ब्यभिचार और लूट में सामिल होने के साथ-साथ समाज को  भी उसी दिशा में ले जाने की कोशिश की और दुराचार के अनुकूल महौल बनाने में अपनी पूरी ताकत लगाई।

आशा राम पर छेड़छाड़ का आरोप लगते ही मडीया ने लगभग तीन महीने लगातार आशा राम को बदनाम करने के लिए सेकिलर गद्दारों से पैसा लेकर काल्पनिक कहानियं बनाकर उनके बिरूद्ध समाज में घृणा का बाताबरण बनाने का भरपूर प्रयास किया वहीं तरूण तेजपाल पर बालातकार का संगीन आरोप लगने के बाभी सेकुलर गद्दारों और मिडीया ने उसे नेक सेकुलर इनसान साबित करने का भरपूर प्रयास किया कहांनिया चलाने का तो प्रशन ही पैदा नहीं होता।

जहां आशा राम पर लगे छेड़छाड़ के आरोप को बालातकार बताने की भरपूर कोशिश की गई वहीं तेजपाल पर लगे बालाताकर के आरोप को आपसी मन मुटाब कहकर दबाने की भरपूर कोशिश की गई।

जहां आशा राम पर लगे आरोप के बाद उसकी बेटी और पत्नी को बदनामकर फंसाने की भरपूर कोशिश सेकुलर गद्दारों और मिडीया ने वहीं तरूण तेजपाल दारा अपनी बेटी की सहेली से बालातकार करने के बाबजूद उसके परिवार के उपर एक शब्द कहने की कोई भी कोशिश सेकुलर गद्दारों द्वारा नहीं की गई(करनी भी नहीं चाहिए लेकिन आशा राम के परिवार पर क्यों?)।    

आशा राम पर आरोप लगने के साथ ही हरामी सेकुलर गद्दारों द्वारा उनकी सम्मपति और वयक्तिगत जीवन के बारे में इतनी घृणा फैलाई गई कि सेकुलर सरकारों व बोद्धिक गुलामों ने प्रभाव में आकर  उनकी सम्मपतियों पर हमले शुरू कर दिए जबकि तरूण तेजपाल द्वारा दामिनी पर हुई दरिंदगी के जैसी ही दरिंदगी साबित हो जाने के बाबजूद सेकुलर गद्दारों और सेकुलर सरकारों व उनके पालतु मिडीया ने इस दरिंदे के बिरूद्ध न तो कोई घृणा का बाताबरण बनाया और नहीं कोई कार्यवाही करने की जहमत उठाई इस दरिंदे द्वारा बनाय गए ऐशो आराम के अड्डों पर आज भई  नशे से लेकर जुए औऱ वेशयवृति तक के हर तरह के गैर कानूनी ब आसामाजिक कुकर्म यथाबत जारी हैं।

आशाराम पर लगे आरोपों के कई महीने बीत जाने के बाद आज भी उनको बदनाम कर उनके प्रति घृणा पैदा के का कुकर्म यथाबत जारी है जबकि दरिंदे तरूण तेजपाल पर सेकुलर गद्दारों की खामोशी यथाबत जारी है।

मन में एक ही पर्श्न पैदा होता है कि आशा राम पर तो एक आरोप मात्र है तो भी आशाराम , उसकी बेटी, उसकी पत्नी उसके भक्त सबके सब को बदनाम कर उनके बिरूद्ध घृणा का बातबारण का निर्माण कर उनकी जिन्दगी को तबाह कर देने का षडयन्त्र आखिरकार इन सेकुलर गद्दारों द्वारा क्यों किया गया? जबकि दरिंदे तरण तेजपाल और तरूण तेजपाल की दरिंदगी पर पर्दा डालने का अपराध करने वाली सोमा चौधरी को हर तरह से बचाने का प्रयत्न सेकुलर गद्दारों द्वारा क्यों किया गया ?

मित्रो गहन विचार करने के बाद  यही कारण नजर आते हैं

1)पहला ये कि आसा राम सेकुलर गद्दारी हमेशा पोल खोलते रहे  जबकि तरूण तेजपाल सेकुलर गद्दार का अपना चहेता है।

2) आशा राम ने वयक्गत कमजोरिया होते हुए भी समाज को भारतीय संस्कृति का अनुशरण करने का रास्ता दिखाया वही रास्ता जिससे दुराचारी , ब्याभिचारी और नसैड़ी सेकुलर गद्दार नफरत करते हैं  और तरूण तेजपाल क्योंकि खुद   दुराचारी , ब्याभिचारी और नसैड़ी है इसीलिए सेकुलर गद्दार औरकार इसे पसन्द करते हैं।

3)आशा राम बिदेशी नेता, विदेशी सोच, बिदेशी मिडीया , बिदेशी बस्तुओं का विधीरो रहा है जबकि तरूण तेजपाल खुद भारत के बिदेशी शत्रुओं का ऐजेंट रहा  है और इस मामले में सेकुलर सरकारों और सेकुलर गद्दार उसके साथ हैं।

4) आशा राम र्चच द्वारा किए जा रहे धर्मांतरण व अन्य भारतविधी षडयन्त्रों के हमेशा बिरोधी रहे हैं जबकि तरूण तेजपाल और सेकुलर मिडीया व सेकुलर सरकारें पूरी तरह चर्च के इसारे पर काम करती हैं।

5)बापू आशा राम ने हिन्दूओं को आतंकवादी कहे जाने के बिरूद्ध  अन्य सन्तों के साथ मिलकर सेकुलर गद्दारों , सेकुलर सरकारों, सेकुलर मिडीया के बिरूध पानीपत की तीसरी लड़ाई की घोषणा की ।

अगर सेकुलर गद्दारों ने पाकिसतानी आतंकवादियों से मिलकर हेमंत करकरे को न मरवाया होता तो इसी तीसरी लड़ाई में petro dollar & Us dollar पर पलने वाले सेकुलर गद्दारों , सेकुलर पार्टियों और सेकुलर मिडीया का आज तक नमोनिशान मिट गया होता...